एक पिता
पिता का दिन आया,
तो एक ख्याल मेरे मन में भी आया।
सोचा मैं भी कुछ लिखूँ,
सब पिता के जैसा मैं भी दिखूँ।
जब छोटे थे तो अपने पिता को भागता हुआ पाते थे।
हमें क्या पता था वो खुद भूखा रह कर हमारा पेट पालते थे।
आज मैं भी एक पिता हूँ,
उन सभी जिम्मेदारियों को जानता हूँ।
और अपने सीने में बड़ी हिम्मत पालता हूँ,
एक छोटी सी फॅमिली को अब मैं भी संभालता हूँ।
बच्चों की गिट पिट,
बहू की झट पट,
हमें कितना ही सताती है दोस्तों,
लेकिन सच कहूँ।
जब वक़्त आपको अकेला छोड़ता है,
तब ये ही साथ निभाती हैं दोस्तों।।
एक परिवार, परिवार होता है।
घर तो घर, घरबार भी होता है।।
--सन्त राज खांडोदिया (SRK)
तो एक ख्याल मेरे मन में भी आया।
सोचा मैं भी कुछ लिखूँ,
सब पिता के जैसा मैं भी दिखूँ।
जब छोटे थे तो अपने पिता को भागता हुआ पाते थे।
हमें क्या पता था वो खुद भूखा रह कर हमारा पेट पालते थे।
आज मैं भी एक पिता हूँ,
उन सभी जिम्मेदारियों को जानता हूँ।
और अपने सीने में बड़ी हिम्मत पालता हूँ,
एक छोटी सी फॅमिली को अब मैं भी संभालता हूँ।
बच्चों की गिट पिट,
बहू की झट पट,
हमें कितना ही सताती है दोस्तों,
लेकिन सच कहूँ।
जब वक़्त आपको अकेला छोड़ता है,
तब ये ही साथ निभाती हैं दोस्तों।।
एक परिवार, परिवार होता है।
घर तो घर, घरबार भी होता है।।
--सन्त राज खांडोदिया (SRK)
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