राहे ज़िन्दगी

राहे ज़िन्दगी जब चलता हूँ तो कुछ लम्हे बहुत याद आते हैं ।
और इन लम्हों में जब खेलता हूँ तो वो लम्हे बहुत याद आते हैं ।।
ज़िन्दगी इतनी कठिन तो नहीं पर,  फिर वो लम्हे बहुत याद आते हैं ।
और इन लम्हों में जब ज़िन्दगी को देखता हूँ तो, उन लम्हों के लिए आँसु बहुत आते हैं ।।
मैं रोक नहीं पता हूँ जब, ख़ुशी के वो लम्हे बहुत याद आते हैं ।
फिर जब वो सब कुछ  हुआ जो, हम चाहकर भी ना रोक पाते हैं ।।
फिर राहे ज़िन्दगी जब रोता हूँ तो, वो लम्हे बहुत याद आते हैं ।
.......वो लम्हे बहुत याद आते हैं !!!!!!!

-- सन्त राज खांडोदिया

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